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इस बड़ी वजह के चलते कलियुग की शुरुआत, जानकर आपको भी नहीं होगा यकीन

पुरानों में चार युग बताए गए हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग. जिनमें से कलयुग को एक श्राप कहा जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस पृथ्वी पर कलयुग कैसे आया और कैसे हुई कलयुग की शुरआत ? तो आइए आपको बताते हैं…

क्या हमने कभी इस बात की तरफ ध्यान दिया है कि ऐसे क्या कारण रहे होंगे जिसके चलते कलयुग को धरती पर आना पड़ा ? महान गणितज्ञ आर्यभट ने अपनी किताब आर्यभटीय में इस बात का वर्णन किया है जब वो 23 साल के थे तो कलयुग को 3600 वां वर्ष चल रहा था. आकड़ो के अनुसार आर्यभट का जन्म 467 ई में हुआ था. वहीं अगर गणना की जाए तो कलयुग का आरंभ 3102 ई. पूर्व हो चुका था.

जब धर्मराज युधिष्ठिर अपना पूरा राज-पाठ परीक्षित को सौंपकर अन्य पांडवों और द्रौपदी सहित महाप्रयाण हेतु हिमालय की ओर निकल गए थे. उन दिनों खुद धर्म बैल का रूप लेकर गाय के रूप में बैठी पृथ्वी देवी से सरस्वती नदी के किनारे मिले. जहां उन्होंने देखा कि गाय रूपी पृथ्वी की आँखे आँसूओं से भरे हुए है और वोलगातार बह रहे थे.

जिस वजह से पृथ्वी को दुखी देख धर्म ने उन से उनकी परेशानी का कारण पूछा- धर्म ने कहा कि देवी तुम ये देखकर तो नहीं रो रही हो कि मेरा बस एक ही पैर है या तुम इस बात से दुखी हो की अब तुम पर बुरी ताकतों का शासन होगा. इसके बाद पृथ्वी देवी ने जवाब देते हुए कहा-  धर्म तुम तो सब जानते ही हो, ऐसे में मेरे दुखों का कारण पूछने का क्या लाभ.

भगवान कृष्णा जी के सौदान चले जाने के वजह से कलयुग ने मुझ पर कबजा कर लिया है. पहले मुझ पर कई गुणों के स्वामी भगवान कृष्ण का पैर पड़ता था, तो मैं अपने आपको भाग्यशाली मानती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब मेरा स्वाभाग्य समाप्त हो चुका है.

धर्म और पृथ्वी आपस में बात ही कर रहे थे कि इतने में असूर रूपी कलयुग वहां आ पूंछा और बैल और गाय रूपी धर्म और पृथ्वी को मारने लगा. इसी दौरान राजा परीक्षित वहां से गुजर रहे थे और जब उन्होंने ये नजारा देखा तो कलयुग पर बहुत ज्यादा गुस्सा करने लगे और उससे कहा कि तू कौन है इन गाय और बैल को क्यों मार रहा है ? तू पापी है, दुष्ट है. इसलिए तेरा वध निश्चित है. राजा परीक्षित ने गाय के रूप में पृथवी और बैल के रूप में धर्म को पहचान लिया था.

राजा धर्म से रहते हैं “हे धर्म सतयुग में आपके तप, पवित्रता, दया और सत्य ये 4 चरण थे. फिर त्रेता में 3 चरण ही रह गए. द्वापार में 2 ही रह गए और अब इस दुष्ट कलयुग के कारण आपका 1 ही चरण रह गाया है. पृथ्वी देवी भी इस बात से दुखी है. इतना बोलते ही राजा ने तलवार निकाली और कलयुग मारने के लिए आगे बढ़े.

राजा का गुस्सा देख कलयुग डर गया और राजा से माफी मांगने लगा. जिसके बाद राजा ने कलयुग से कहा कि तुम यहां से चले जाओ और फिर कभी यहां लौटकर मत आना, ये बात सुनकर कलयुग ने राजा से कहा पूरी दुनिया पर आपका निवास है धरती पर ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां आफका राज ना हो. ऐसमें मुझे रहने के लिए स्थान प्रदान करें.

कलयुग की इस बात को सुनते असत्य, मद, काम और क्रोध का निवास यहां भी होता है. तू इन 4 स्थानों पर रह सकता है, लेकिन इस पर कलयुग बोला- हे राजन ये 4 स्थान मेरे रहने के लिए अपर्याप्त है, मुझे अन्य जगह भी प्रदान करें. इस वजह से राजा ने कलयुग को 5 वें स्थान के रूप में स्वर्ण प्रदान किया. इसके बाद से कलयुग में लालच और अपराध ने अपना वास किया. अब लोग धन के लिए अपास में मर कटेंगे और अपराध भी करेंगे.